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Publisher:  Unclaimed!
Message frequency:  2.58 / day

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कौन उठकर देखता है यार मर जाने के बादज़िन्दगी को कभी छुआ कि नहींवो अभी तक तेरा हुआ कि नहीं दिल को खाली कभी नहीं रखतेदिल में पाला नया सुआ कि नहींबाज़ियां हारकर भी दम भरनाखेलना है नया जुआ कि नहींदेखकर चलना चाहिये तुझकोहै कहीं खाई या कुआ कि नहींचार भी हो गईं नज़र दो सेतेरे सीने में कुछ हुआ कि नहींशौक़ से आ गये हो मक़्तल मेंसर पे लाये कोई दुआ कि नहींन बताये तो पूछ ले जाकरतू अभी भी म...

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खुजली से आनन्द रस मिलता हैखुजली एक आनन्दमय त्वचा रोग है। जिस व्यक्ति को खुजली रहती है। उसे अच्छा लगता है, जब वह उसे खुजलाता है। भावविभोर हो जाता है जैसे दुनिया की न प्राप्त होने वाली चीज है और उस चीज को वह प्राप्त कर लिया हो।खुजली ब्रह्म का दिया हुआ एक अमृत रस का पान होता है। सबको नहीं मिलता है जिसको मिलता है वह एक सच्चा भक्त होता है। समाज में व्याप्त अंधविश्वास, ईर्ष्या, गुस्सा...

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भविष्य की आहट: वर्तमान की नीतियों और मानवीय निर्णयों से निर्मित यथार्थभविष्य कोई काल्पनिक कथा नहीं है जो केवल कल्पना के सहारे गढ़ी जाती हो। वह वर्तमान के निर्णयों, नीतियों, तकनीक, सामाजिक चेतना और मानवीय व्यवहार से धीरे-धीरे आकार लेती हुई वास्तविकता में बदलता है। आज हम जो सोचते हैं, जो नीतियाँ बनाते हैं और जो सामाजिक मूल्य खुद के भीतर आत्मसात करते हैं, वही हमारी कल की दुनिया की ...

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तुलसीदास और शेक्सपियर की समानताएं और तुलनातुलसी और शेक्सपियर दो संस्कृतियों के महान कवियों की तुलना साहित्य की दुनिया में कुछ नाम ऐसे होते हैं जो समय की सीमाओं को पार कर जाते हैं और मानव मन की गहराइयों को छू लेते हैं। ऐसे ही दो महान कवि हैं तुलसीदास और विलियम शेक्सपियर, जो एक-दूसरे से पूरी तरह भिन्न संस्कृतियों के प्रतिनिधि होने के बावजूद मानवीय अनुभवों की सार्वभौमिकता को उजागर ...

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शरीर का कारागारशरीर — एक बंद जेल,जिसे हमने जीवन समझ लिया।अस्थियाँ — सलाखें हैं,हर साँस उनका प्रहरी।रक्त — थका हुआ कैदी,नाड़ियों में घूमता चक्कर।दिल — अपील लिखता रहता,पर कोई अदालत नहीं।मन — खिड़की चाहता है,पर दीवारें ही दीवारें।आशा — एक पतली सी रेखा,अँधेरे में काँपती लौ।समय — वार्डन की तरहचुपचाप गश्त लगाता है।और हम — उसी भीतरकदम गिनते रहते हैं।जन्म से गिरफ्तारी,मृत्यु तक की रिमां...

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