Please turn JavaScript on

हिन्दीकुंज,Hindi Website/Literary Web Patrika

Following हिन्दीकुंज,Hindi Website/Literary Web Patrika's news feed is very easy. Subscribe using the "follow" button on the top right and if you want to, choose the updates by topic or tag.

We will deliver them to your inbox, your phone, or you can use follow.it like your own online RSS reader. You can unsubscribe whenever you want with one click.

Keep up to date with हिन्दीकुंज,Hindi Website/Literary Web Patrika!

हिन्दीकुंज,Hindi Website/Literary Web Patrika: हिन्दीकुंज,Hindi Website/Literary Web Patrika

Is this your feed? Claim it!

Publisher:  Unclaimed!
Message frequency:  2.37 / day

Message History

लहरों के राजहंस नाटक का उद्देश्य | मोहन राकेशमोहन राकेश द्वारा रचित ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित नाटक 'लहरों के राजहंस' मात्र एक ऐतिहासिक कथा नहीं है, बल्कि यह आधुनिक मनुष्य के अंतद्वंद्व, संशय और मानसिक संघर्ष को उजागर करने वाला एक बेहद गंभीर उद्देश्यपरक नाटक है।साहित्यकार की कोई भी कृति निरुद्देश्य नहीं होती। साहित्यकार की अपनी मान्यताएँ, विचार और सिद्धान्त होते हैं, जिनमें कि...

Read full story
देह धुर्रा के ढेर रे संगीदेह धुर्रा के ढेर रे संगी, एकर का भरोसा,देह धुर्रा के ढेर रे संगी, एकर का भरोसा,हवा चलिस त उड़ जाही, का राजा का रोसा।साँस के डोरी बंधे हवय बस, पल-दू पल के आस,काल झपट्टा मार लेही, रहि जाही खाली साँस।देह धुर्रा के ढेर रे संगी...मन के भीतर मनखे खोजत,उमर गिस बरबोसा।एके बात ल सच मानेनव,दुनिया लागिस धोखा।ओही सच के राख समेटत,भीतर सूत जरिस।जेन ल हीरा समझत रहेंव,...

Read full story
अस्तित्व का सौंदर्यपक्षियों के लिए,पंखों का होना हीजीवन का वरदान है।तितलियों के लिए,फूलों के बीच मँडराते हुएअपनी रंगत बिखेरना हीउनका सौंदर्य है।और हम इंसानों के लिए,जीवन की सच्ची सार्थकतातभी खिलती है,जब हम एक-दूसरे के साथप्रेम, सौहार्द और समझदारी सेजीना सीखते हैं।माँ का विलापबोल रही हूँ...कल के दिन की सारी खुशियाँ हीमेरी ताकत बनकर जीने वाले मेरे बच्चे की आँखें थीं।नन्हा-सा चेहरा...

Read full story
सफलता की आकांक्षाजब हम सफलता की आकांक्षा की बात करते हैं, तब दो शब्द हमारा ध्यान खींचते हैं- 1. सफलता 2. आकांक्षा। सफलता की आकांक्षा को समझने के लिए इन दोनों शब्दों पर विचार करना आवश्यक है। आकांक्षा व्यक्ति की मूलभूत प्रवृत्ति है। यह व्यक्ति की आन्तरिक चेतना है, जो व्यक्ति को कुछ न कुछ करने को प्रेरित करती है। आकांक्षा विकास प्रक्रिया का आरंभ है। अतः आइए पहले हम आकांक्षा के बारे...

Read full story
मेरा गांवमैं जहां रहता हूं,वही तो है मेरा गांव | मतलब यह नहींकि मेरे निवासित गांव का मैं आदी बन गया हूंकहना यह हैकि अपने गांव कोमैं यहां ले आया हूं |जीवन सारातुलना करते करते ही बीत रहा है।यहां जितनी ऊंचाइयों पर चढ़ चुका हूँहमारे गांव के ढेर से भी वे नाटी लगती हैं ।हमारे आंगन मेंसीमेंट इसलिए नहीं लगवायाकि अगर छिड़काव नहीं करें तोजीवन परिमल सेएकदम दूर हो जाएंगे |हमारे बो...

Read full story